कैसी हो, एक बात कहु
कैसी हो, एक बात कहु यार मैं जब भी तुम्हे देखता हू तो मुझे ना जाने क्या हो जाता हे, पता नही कुछ समज़ नही आता मन भी कही नही लगता. दिन भर आप के ही बारे सोचता हू, अपना काम भी ठीक से नही कर पाता हू. मेने जब तुम्हे पहली बार देखा था शायद तभी से तुम्हे पसंद करने लगा हू. बस समझ नही पाया इतनी समज़ नही हैं ना. एक रियल बात कहता हूँ कुछ दीनो से तो मे पागल हो गया हू, जहा देखु तुम नज़र आती हो. आपके बिना मैं जी नही सकता और अपपको भुला भी नही सकता.मेरा तसुबूर मेरी दीवानगी तुम ही तो हो. काश तुम्हे खबर होती ये ज़िंदगी तुम बिन हर लम्हा मुझे तड़पाती हे. मे क्या करू ज़िंदगी से भाग कर. आप का पता भी तो नही मुझे पता की तुम अब बहुत बड़ी प्राब्लम मे हो पर मे तुम बिन पल पल मर रहा हू अब तुम ही बताओ मे क्या करू. मे मर भी तो नही सकता क्यो की मुझे आप के साथ जीना हे. मे आप का इंतज़ार जब तक करूँगा जब तक हा नही बोलती चाहे अगले जनम मे मिले. मे आप के सिवा किसी ओर से शादी करने की सोच भी नही सकता. दुनिया के किसी कोने मे एक इंसान बहुत खुश हे क्यो की आप खुश हो. मुझे मे आपका सामना करने की हिमत नही हैं. नही तो खुद बोल देता आप को "i love you". अब सब आप के हाथ मे हैं इस ग़रीब का नसीब भी. आप की आखो ने आप की हसी ने सब कुछ लूट लिया मेरा अब तुम हा करो या ना, मेरे दिल मे बस तुम्ही रहोगी मरते दम तक..........;(
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