मेरी जानेमन
मेरी जानेमन, मेरी ज़िंदगी, मेरी तमन्ना, मेरी खुशी…. तुम्हें किस नाम से पुकारूँ, तुम्हें किस तरह से आवाज़ दूँ ? मेरी समझ में नही आता. मेरा एक दिन , एक रात , कोई पल, सुबह-शाम, ऐसा कोई वक़्त नहीं है जब मैं तुम्हारे बारे मैं ना सोचता हूँ. तुम हो कि तुम मुझे देख कर भी अनदेखा कर देती हो.
हाँ , ऐसा नहीँ कि तुम मुझसे बात नहीं करती कभी कभी, लेकिन मैं तो हर वक़्त तुमसे बात करना चाहता हूँ. तुम्हारा हाथ हर वक़्त अपने हाथों में थामना चाहता हूँ. ज़िंदगी में कभी भी इस हाथ को ना छोड़ने के लिए तुम्हारा हाथ थामना चाहता हूँ.
बस, कमी यही है कि मैं आज तक तुम्हें अपने दिल की बात नहीं बता पाया. प्रेम पत्र (Love Letter) लिख कर बताऊं भी तो कैसे, यही डर लगता है कि अगर तुमने ना कह दिया तो तुम्हें हमेशा हमेशा के लिए खो दूँगा. अभी तुम मेरी हो, मैं तुम्हारे साथ ना सही, आसपास तो रहता हूँ. तुमने मुझे अपनाया नहीं है तो इनकार भी तो नहीं है ना अभी तक. इसी ख्याल के सहारे मेरे दिन-रात काट रहे हैं की शायद किसी दिन तुम मेरा प्यार पहचानो और मेरे पास आकर कहो – मैने तुम्हारी आँखों में प्यार की दास्तान पढ़ ली है माय लव और आज से हमेशा के लिए मैं तुम्हारी हूँ.
बस उसी दिन के इंतज़ार में मैं तुम्हारी तस्वीर दिल में लिए बैठा हूँ.
तुम्हारा और सिर्फ़ तुम्हारा
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