तुम्हारे नाम के साथ कुछ
- आकांक्षा,
तुम्हारे नाम के साथ कुछ और जोड़ने की हिम्मत नहीं है मेरी, न हीं कुछ और जोड़ना मैं जरूरी समझता हूँ. जरूरत हीं नहीं तुम्हारे नाम के आगे “प्यारी”, “प्रिय” या “डिअर” लगाने की. तुम्हारा नाम लेने के साथ जो चेहरा उभरता है, उससे तो सहज हीं प्यार हो जाए. फिर तुम्हें किसी और विशेषण की क्या आवश्यकता. तुम तक यह बात लिखकर पहुंचा रहा हूँ, क्योंकि तुम्हारे सामने होने पर मैं कुछ बोल नहीं पाता. सोचता बहुत हूँ, कि इस बार मिला तो ये कह दूंगा या वो कह दूंगा. लेकिन कभी कह नहीं पाता. तुम्हारी मासूम बड़ी-बड़ी सी आँखों से जब तुम मुझे देखकर निश्छल बच्चों सी हँस देती हो, मैं सबकुछ वहीं भूल जाता हूँ. और उसके बाद जब तुम बोलना शुरू करती हो, तो रूकती कहाँ हो, मैं तो असहाय सा फिर तुम्हारी कहानियों में तुम्हारे पीछे-पीछे चलता रहता हूँ.
इतनी बातें करनी होती है तुम्हें कि मुझे आश्चर्य होता है कि तुम्हारी बातें इतने हीं अक्षरों में पूरी कैसे हो जाती है. और वो जो तुम अपने चेहरे पर आने वाले बालों को सिर्फ एक ऊँगली से कानों के पीछे टिका देती हो, तो मेरा दिल भी मानो उसी में कहीं उलझ जाता है. और चाय के कप को दोनों हाथों से पकड़कर जब तुम चाय को फूंकती हो, उस हवा में मेरे सारे ख्याल झट से उड़ जाते हैं और सिर्फ तुम्हारा चेहरा दिमाग में बस जाता है. जाने क्या है तुम्हारे अंदर कि जो इन्सान तुम्हें एक बार जान ले वो तुम्हें लेकर इतना protective हो जाता है कि दुनिया भर से तुम्हारी मासूमियत को बचा लेना चाहता है. गुस्से में तुम जो वो गाल फुलाकर बैठ जाती हो ना, इतनी प्यारी लग रही होती हो कि बस वही देखने के लिए तुम्हें कई बार चिढ़ा देता हूँ. लो तुमने फिर से बात से भटका दिया, तुम हो हीं ऐसी….. तुम्हारे ख्यालों के अन्दर जाने का तो रास्ता है लेकिन बाहर आने का नहीं. कहना बस इतना है कि मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी हर हंसी में साथ हँसने के लिए और तुम्हारे हर आंसू को समेटने के लिए मैं हमेशा तुम्हारे पास रहूँ. मैं तुम्हारी कहानियों में घूमना चाहता हूँ, तुम्हारी बकबक सुनना चाहता हूँ. तुम्हारे साथ लड़ना और फिर तुम्हें मनाना चाहता हूँ. जिंदगी की भागदौड़ के बीच से ये छोटी-छोटी खुशियाँ चुराना सीखना चाहता हूँ. तुम्हारे हंसी की वजह होना चाहता हूँ. तुमसे जीना सीखना चाहता हूँ. और हाँ अब मैं तुमसे कह सकता हूँ कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ. और शायद इससे भी ज्यादा प्यार करना चाहता हूँ.
तुम्हारा – राजीव
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